| 498-ए के मारे कितने बेचारे |
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| Written by Ashwani Kumar Nigam |
| Wednesday, 22 September 2010 23:00 |
मैं अपने मां-बाप को जेल की सलाखों के पीछे नहीं देख सकता. उन्होंने मुझे बेहतर ढंग से न सिर्फ पढ़ाया-लिखाया है, बल्कि एक अच्छा इंसान बनाने भी हर संभव कोशिश की है. मेरी वाइफ ने मेरे खिलाफ दहेज उत्पीड़न का झूठा केस दर्ज कराया है. मेरा परिवार इससे काफी मुश्किलों में पड़ गया है. उन्हें परेशान नहीं देख सकता, इसलिए आत्महत्या कर रहा हूं. पत्नियों से प्रताड़ित पतियों को राहत दिलाने के लिए देश भर में मुहिम चला रहे संगठन सेव फैमिली इनिशिएटिव की मानें तो पांच सालों में इस कानून के दुरुपयोग के कारण 2 लाख 23 हजार 167 हसबैंड सुसाइड कर चुके हैं. झारखंड और रांची में भी कई लोग इस लीगल अत्याचार के शिकार बने हैं. उजड़ गया आशियाना एक नेशनल इंगलिश डेली न्यूज पेपर में काम करनेवाले मिस्टर विजय (बदला हुआ नाम) की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. वह बताते हैं : इस सिटी में एक जर्नलिस्ट की हैसियत से मेरी प्रतिष्ठा थी. अपने मां-बाप की पसंद की गई लड़की से मेरी 1998 में शादी हुई. शुरू में सब कुछ ठीक रहा, लेकिन धीरे-धीरे मेरी पत्नी के घरवाले मेरे निजी मामले में दखल देने लगे. मेरी पत्नी को घर से अलग होने के लिए उकसाने लगे. मेरी वाइफ मेरे ऊपर मुझे मां-बाप के घर से अलग रहने का दबाव बनाने लगी. तंग आकर मैं अपने घर से अलग होकर अपनी पत्नी के साथ अलग घर में रहने लगा. फिर कुछ दिनों बाद मेरी वाइफ बीमार पड़ गई. मैंने उसका इलाज सिटी के टॉप डॉक्टरों से कराया. मेरे ससुरालवाले मेरी पत्नी को मेरे घर की पैतृक संपत्ति को बंटवारे के लिए भड़काते रहे. मेरी पत्नी इस बात को लेकर मुझसे लड़ने लगी. मैंने कहा कि जब पैतृक संपत्ति का बंटवारा होगा, तो जितना मेरे हिस्से में है मुझे मिलेगा. लेकिन मेरी पत्नी कहती थी कि उसके नाम ही मेरी मां प्रॉपर्टी को लिख दें. इसी दौरान मैं एक बेटी का बाप बना. मेरे पिता जी का निधन हो चुका था और मेरी मां ही मेरी परिवार संपत्ति की मालिक थीं. जब मैंने ऐसे करने से मना किया, तो को महिला थाने में मेरी शिकायत की गई और सदर थाने में मेरे खिलाफ 498ए का फर्जी मामला दर्ज कराया गया. मुझे इस झूठे मामले में जेल भेज दिया गया. इस मामले में न सिर्फ मुझे बल्कि मेरी मां, भाई, मेरी शादीशुदा तीन बहनों, मेरे जीजा जी पर केस दर्ज हुआ. इस मामले में मैं 10 महीने जेल में रहा. मुझे मेरी बेटी से अलग कर दिया गया. मेरे ससुरालवालों ने मेरी पत्नी का सही तरीके से इलाज नहीं कराया. मेरी पत्नी, जिसको उसके मां-बाप ने इस पूरे मामले में इंवाल्व किया, वह बीमारी से मर गई. मैं पूरी तरह से टूट गया. मेरा बसा बसाया घर 498ए ने उजाड़ दिया. भाई पागल हो गया इस कानून के दुरुपयोग के कारण बर्बाद हो चुकीं सुष्मिता बताती हैं कि पिता की मौत के बाद उनका भाई ही उनके परिवार का सहारा था. वह गवर्नमेंट सर्विस में था, लेकिन पत्नी के कारण उसे नौकरी छोड़नी पड़ी. उसकी पत्नी ने दहेज उत्पीड़न के झूठे मामले में फंसा दिया था. एक बार 15 दिन और दूसरी बार उसे चार महीने की जेल हो गयी. वह तीन साल तक इस झूठ से लड़ता रहा और एक दिन वह टूट गया. उसकी हालत पागलों की तरह हो गई. वह कभी-कभी चिल्ला-चिल्ला कर कहता है कि वह बेगुनाह है. लेकिन उसकी बात को न तो पुलिस मानती है और न ही समाज का यकीन है. यह कहते हुए सुष्मिता जोर से रोने लगती हैं. 489-ए कानूनी आतंकवाद सुप्रीम कोर्ट इस कानून के दुरुपयोग को देखते हुए इसे लीगल टैररिज्म बता चुका है. 498 के एंटी डाउरी ला का कुछ लोग कैसे मिसयूज कर रहे हैं, इसको सुप्रीम कोर्ट भी संज्ञान में ले रहा है. अभी हाल ही में रांची हाईकोर्ट में दहेज उत्पीड़न के एक मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के एक बेंच के जस्टिस दलवीर भंडारी ने कमेंट किया है कि दहेज उत्पीड़न के नाम पर पूरे देश में बहुत सार फर्जी मामले दर्ज किए जाते हैं, इसलिए गवर्नमेंट को इस कानून में समय के अनुसार परिवर्तन करने की जरूरत है. 94 प्रतिशत मामले फर्जीनेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े के अनुसार पिछले पांच सालों में इस मामले में बिना ट्रायल और जांच के 550804 पुरुषों और 160416 महिलाओं को जेल भेज दिया गया है. दरअसल इस मामले में पुलिस की भूमिका भी ठीक नहीं होती है. 498-ए में बिना जांच और सबूत के ही किसी को गिरफ्तार कर लिया जाता है. इस श्रेणी के तहत किया अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती है. यानी लड़की की झूठी शिकायत पर ही पति पक्ष के लोगों को फौरन गिरफ्तार कर लिया जाता है. जेंडर ह्यमन राइट सोसाइटी के संदीप कुमार ने बताया कि बिना जांच और सबूत के किसी को गिरफ्तार करना प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है. होना यह चाहिए कि पुलिस शिकायत आने पर पहले जांच करे, तो दोषी पाने पर गिरफ्तार करे. राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल भी 498 ए के दुरुपयोग पर चिंता जाहिर करत हुए इसे देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बता चुकी हैं. सेव इंडियन फैमिली फाउंडेशनयह तो सिर्फ एक बानगी है. ऐसे मामले से लड़ने के लिए पतियों ने एक संगठन को बनाया है. बेंगलुरू में एक सेव इंडियन फैमिली फाउंडेशन की नींव रखी, जिसे सिफ के नाम से जाना जाता है. आज यह संगठन देश के करीब 20 राज्यों और 50 शहरों में हेल्प लाइन चला रहा है. इसके अलांवा सिफ की एनआरआई हेल्पलाइन भी चला रहा है. क्या है 498-ए विवाहित महिलाओं को दहेज प्रताड़ना से बचाने के लिए साल 1983 में आईपीसी की में धारा 498-ए जोड़ी गई.यह गैर जमानती धारा है. इसमें महिलाओं को पर्याप्त अधिकार मिला हुआ है.कैसे होता है दुरुपयोग पुलिस बिना जांच के नामजद लोगों को गिरफ्तार करती है. ससुराल वालों को परेशान करने के लिए लड़की-पक्ष सबका नाम एफआईआर में दर्ज करा देता है. जिसमें घर की महिलाएं और नाबालिग बच्चे तक शामिल होते हैं. कैसे रुकेगा दुरुपयोग आरोपियों की गिरफ्तारी तब तक न हो, जब तक लड़की पक्ष अपनी शिकायत के सपोर्ट में सबूत या साक्ष्य उपलब्ध न करा दे.एफआईआर में जो आरोप लड़के और उसके परिजनों पर लगाए जा रहे हैं, उन्हें साबित करने के लिए लड़की पक्ष से दो गवाह या डॉक्यूमेंट एफआईआर दर्ज करते वक्त मांगे जाएं. अरेस्ट करते समय सीनियर पुलिस अधिकारी की रिकमेंडेशन लें. |




