| पति समेत परिवार के सदस्य हत्या के आरोप से मुक्त |
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| Written by Dainik Jagaran |
| Tuesday, 12 May 2009 13:21 |
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विवाहिता की हत्या के मामले में फंसे उसके पति समेत परिवार के सात लोगों को हाईकोर्ट से राहत मिल गई। कोर्ट ने सभी को आरोप मुक्त कर दिया है। जस्टिस प्रदीप नंदराज योग की पीठ ने निचली अदालत के आदेश को पलटते हुए यह फैसला सुनाया है। पेश मामले में लक्ष्मी 20 जुलाई 2002 को ससुराल में मृत पाई गई थी। लक्ष्मी की छोटी बहन राजो भी उसी घर में ब्याही है। उसने पुलिस को दिए बयान में कहा था कि घटना वाले दिन लक्ष्मी का पति बलवीर सिंह, सास धनपति, ससुर रणधीर सिंह व देवर सुंदर उसे घसीटते हुए सीढि़यों से ऊपर ले गए थे। कुछ देर बाद उसने देखा कि लक्ष्मी कमरे में मृत पड़ी हुई है। उसके गले में रस्सी थी। घटना के अगले दिन वह डर के कारण मायके चली गई थी। एक सप्ताह बाद जब वह वापस ससुराल आई तब उसने पुलिस को दिए बयान में यह आरोप लगाया था। पुलिस ने इन चारों के अलावा परिवार के सात सदस्यों के खिलाफ हत्या की धारा के तहत मामला दर्ज कर लिया था। अभियोजन द्वारा पेश साक्ष्यों के बाद निचली अदालत ने सभी के खिलाफ आरोप तय कर दिया था। जिसे सभी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के बाद पीठ ने कहा कि घटना के बाद जब लक्ष्मी को पड़ोस के लोग देखने आए तो उसकी बहन राजो ने किसी को यह बात क्यों नहीं बताई? घटना के बाद वह मायके चली गई थी। वहां से वापस आने के बाद उसने पुलिस को यह बयान दिया। जिससे पता चलता है कि राजो ने मायके वालों के इशारे पर ससुराल वालों के खिलाफ झूठा आरोप लगाया। इसलिए राजो के बयान को सही नहीं माना जा सकता है। केवल उसके बयान के आधार पर इसे साक्ष्य मानते हुए सभी के खिलाफ आरोप तय कर दिया जाना गलत है। लिहाजा कोर्ट ने सभी को आरोप मुक्त करते हुए उन्हें रिहा करने का फैसला सुनाया। |




