कोर्ट ने पूछा, शादी के कानून 50 साल पुराने क्यों? PDF Print E-mail
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Written by Navbharat Times   
Monday, 03 August 2009 14:07

नई दिल्ली: आईटी के क्षेत्र में हुई क्रांतिकारी तरक्की का फायदा कानून को भी उठाना चाहिए। तेजी से बदलती दुनिया में 50 साल पुराने कानून लोगों को सुविधा देने के बजाय बाधक बन रहे हैं। मैरिज के रजिस्ट्रेशन में पति-पत्नी के रजिस्ट्रार के सामने उपस्थित होने की अनिवार्यता पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार को मैरिज रजिस्ट्रेशन नियमों में बदलाव का सुझाव दिया है।

जस्टिस एस. रवीन्द्र भट ने अमेरिका में रह रहे अनिवासी भारतीय की पत्नी को दिल्ली में मैरिज रजिस्टर कराने में आ रही दिक्कत का हल खोजने में सरकार को कानून में बदलाव का सुझाव दिया। अदालत ने कहा कि मैरिज रजिस्ट्रेशन के लिए 1956 में बना कानून बेमानी लगने लगा है। उस समय विडियो कॉन्फ्रेंसिंग, डिजिटल सिग्नेचर, एंबेसी द्वारा इंटरनेट के जरिए हस्ताक्षर सत्यापित करने की बात कल्पना से परे थी। लेकिन संसद ने आईटी एक्ट पारित करके रोजमर्रा की जिंदगी में आईटी के महत्व को स्वीकार किया है। बेहतर होगा कि इस एक्ट का इस्तेमाल कानून के क्षेत्र में भी किया जाए।

दिल्ली में रहने वाली चरणजीत कौर नागी ने मैरिज सर्टिफिकेट प्राप्त न होने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया था। चरणजीत की शादी अप्रैल-1991 में जसपाल सिंह से हुई थी। फरवरी-1996 में इस दंपती को बेटे की प्राप्ति हुई। उसके बाद जसपाल अमेरिका चले गए। फरवरी-2004 में जसपाल को ग्रीन कार्ड भी मिल गया। पति के पास अमेरिका जाने के लिए चरणजीत ने वीजा के वास्ते अप्लाई किया तो अमेरिका एंबेसी ने मैरिज सर्टिफिकेट मांगा। सर्टिफिकेट न होने पर एंबेसी ने वीजा देने से इनकार कर दिया। चरणजीत ने रजिस्ट्रार ऑफ मैरिज ऑफिस में सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया, लेकिन पति की अनुपस्थिति में रजिस्ट्रार ने सर्टिफिकेट जारी करने से इनकार कर दिया। हिंदू मैरिज एक्ट-1956 की धारा-8 के तहत मैरिज सर्टिफिकेट के लिए पति-पत्नी का रजिस्ट्रार के सामने हाजिर होना लाजमी है।

अदालत ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा-8 की व्याख्या करते हुए कहा कि कानून में सभी शादियों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सभी शादियों को रजिस्टर करने का आदेश दिया है। कानून में साफ कहा गया है कि सरकार मैरिज रजिस्ट्रेशन के लिए सभी सुविधाएं प्रदान करेगी। लिहाजा, सरकार की भूमिका फैसिलिटेटर की है। इसलिए रजिस्ट्रेशन के लिए 50 साल पहले तय किए गए नियमों में संशोधन की जरूरत है।

अदालत ने कहा कि जब दुनिया सिमटकर इतनी नजदीक आ गई हो तो विदेश में रहने वाले पति या पत्नी की दूरी मैरिज रजिस्ट्रेशन में बाधक नहीं बननी चाहिए। सिर्फ सर्टिफिकेट के लिए एक शख्स का अमेरिका से भारत आना पैसे की बर्बादी के सिवा और कुछ नहीं है। जसपाल सिंह मैरिज रजिस्ट्रेशन के फॉर्म भरकर अमेरिका में भारतीय एंबेसी से सत्यापित कराएं और अपनी पत्नी के पास दिल्ली भेज दें। रजिस्ट्रार एक गवाह की उपस्थिति में उनकी पत्नी को मैरिज सर्टिफिकेट प्रदान कर दे।

 

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