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| दहेज विरोधी कानून के दुरुपयोग पर जागी सरकार |
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| Written by आईबीएन-7 |
| Tuesday, 03 November 2009 23:01 |
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नई दिल्ली। दहेज विरोधी कानून का दुरुपयोग हो रहा है और बेकसूर मर्द दहेज विरोधी कानून के शिकार हो रहे हैं। देर से ही सही सरकार को इस सच्चाई का अहसास हो गया है लिहाजा धारा 498 A का दुरुपयोग रोकने के लिए गृहमंत्रालय ने अपनी चिंता जाहिर कर दी है। इस सिलसिले में गृहमंत्रालय ने राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस प्रमुख को चिट्ठी भी लिखी है। चिट्ठी में कहा गया है कि विवाह से जुड़ी प्रताड़ना की शिकायतों पर धारा 498A के तहत गिरफ्तारी आखिरी कदम होनी चाहिए। देखा गया है कि आरोपी पति के परिवार के सभी सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया,भले ही उन्होंने पत्नी पर कोई अत्याचार न किया हो। कभी-कभी इस कानून का इस्तेमाल सिर्फ निजी दुश्मनी निकालने के लिए किया गया। कुछ मामलों में क्षणिक गुस्से की वजह से हुए इस कानून के इस्तेमाल से भविष्य में दोबारा रिश्ते जुड़ने की सभी संभावनाएं खत्म हो जाती हैं। कानूनी जानकारों की राय है कि चूंकि ये एक गैरजमानती अपराध है, इसीलिए पेंच और भी फंस जाता है। जरूरी है कि इसमें कुछ संशोधन किए जाएं। 2003 में गृह मंत्रालय को जस्टिस मलिमथ कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में सुझाया था कि इसमें जमानत का प्रावधान हो, ताकि मियां-बीवी के बीच सुलह समझौते की उम्मीद रहे। गृहमंत्रालय का कहना है कि धारा 498A में संशोधन की कोशिश भी की गई। लेकिन इस कोशिश को महिला संगठनों ने परवान नहीं चढ़ने दिया। कुछ मामलों में अदालत ने भी इस कानून के दुरुपयोग पर उंगली उठाई। इस कानून के तहत तीन साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है। |





