पीडित पुरूषों को "ह्वदया" का सहारा PDF Print E-mail
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Written by Patrika   
Wednesday, 11 November 2009 11:26

कोलकाता। महिलाओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठना कोई नई बात नहीं, लेकिन पुरूषों के हित में आवाज उठाए जाने की बात कुछ अटपटी लगती है। समाज में सिर्फ महिलाओं पर ही अत्याचार होने की बात मान चुके लोग आंकड़ों पर नजर डालें तो जो चौंकाने वाले तथ्य सामने आएंगे, उनके अनुसार जिस अनुपात में पुरूषों का जन्म होता है उससे छह गुना ज्यादा संख्या में वे आत्महत्या करते हैं।

आंकड़ों के अनुसार विवाहित महिलाओं की अपेक्षा विवाहित पुरूष दुगुनी संख्या में आत्महत्या करते हैं।उपरोक्त बातें पुरूषों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले कोलकाता आधारित पहले संगठन ह्वदया के अध्यक्ष डीएस राव ने ह्वदया के उद्घाटन के मौके पर कही। समाज में विवाहित पुरूषों को पत्नी एवं ससुराल वालों के अलावा पुलिस, सरकार आदि की भी अवहेलना सहनी पड़ रही है, जिससे कई बार पुरूष आत्महत्या करने के लिऎ विवश हो जाते हैं। जिन पुरूषों का कोई सहारा नहीं, उनके लिए ह्वदया आगे आ रही है।

अध्यक्ष ने बताया कि सेव इंडिया फैमिली (एसआईएफ) मूवमेंट के तहत पुरूष अघिकार संगठन के माध्यम से हम पुरूषों को मानसिक सहारा देंगे। पुरूषों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। एसआईएफ के पीआरओ विराग धुलिया ने 1983 में लागु धारा 498ए (दहेज उत्पीड़न कानून) के खिलाफ आपत्ति जताई। संगठन प्रत्येक सप्ताह रविवार को विक्टोरिया के समक्ष एक बैठक आयोजित करेगा। देश में संगठन की 110 हेल्पलाइन चल रही है।

इस दौरान अपनी पत्नी के अत्याचार से परेशान सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करने वाले शुकांत भट्टाचार्य ने बताया कि उनकी पत्नी व उसके परिवार वाले उन पर कई दिनों से अत्याचार कर रहे हैं। उनकी पत्नी उनकी तीन साल की बच्ची को मारने तक की धमकी दे रही है। उन्होंने पुलिस से लेकर राज्यपाल तक से मदद की गुहार लगाई परंतु कुछ असर नहीं हुआ। हालात से परेशान शुकांत को ह्वदया ने जिंदगी को जीने की एक नई दिशा दिखाई।

 

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