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| 498-ए के मारे कितने बेचारे |
मैं अपने मां-बाप को जेल की सलाखों के पीछे नहीं देख सकता. उन्होंने मुझे बेहतर ढंग से न सिर्फ पढ़ाया-लिखाया है, बल्कि एक अच्छा इंसान बनाने भी हर संभव कोशिश की है. मेरी वाइफ ने मेरे खिलाफ दहेज उत्पीड़न का झूठा केस दर्ज कराया है. मेरा परिवार इससे काफी मुश्किलों में पड़ गया है. उन्हें परेशान नहीं देख सकता, इसलिए आत्महत्या कर रहा हूं. पत्नियों से प्रताड़ित पतियों को राहत दिलाने के लिए देश भर में मुहिम चला रहे संगठन सेव फैमिली इनिशिएटिव की मानें तो पांच सालों में इस कानून के दुरुपयोग के कारण 2 लाख 23 हजार 167 हसबैंड सुसाइड कर चुके हैं. झारखंड और रांची में भी कई लोग इस लीगल अत्याचार के शिकार बने हैं. |








